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हवा नहीं तूफ़ान हूं मैं

And here's my third Hindi poem!! Wrote this at 2:30am last night.

हाथ नहीं किसी के आउ,
हवा नहीं तूफ़ान हूं मैं।

कितना भी कोई रोके टोके,
अपने ही रास्ते जाऊँगा।
है ताकत तो करो सामना,
तुम्हे कुचल बढ़ जाऊंगा।

जितना भी तुम पास आओ,
गले नहीं लगाऊंगा।
छूने की कोशिश करी तो,
चूर चूर कर जाऊंगा।

इतना मैं बुरा ना था पहले,
उस चोट ने ऐसा बना दिया।
घायल किया गंभीरता से ऐसा,
होश में मुझे ला दिया।

बन के मैं शीतल हवा,
लहराता घूमता फिरता था।

गरजती बिजली से फिर हुआ सामना,
हौसला मेरा जड़ दिया।
बादल ऐसा गरजाया उसने,
पानी मुझे कर दिया।

जो दबता है आधा,
दबा उसे देते हैं।
शराफत जो दिखाए ज़्यादा,
बेज़ुबां उसे कर देते हैं।

ठान ली थी उस दिन से,
हवा नहीं तूफ़ान हूं मैं।
कदमो की आहट नहीं,
शेर की दहाड़ हूं मैं।

Polity

People select one from amongst themselves to lead all. Following the culture of giving respect and godly status to elders, they 'make' him God. They worship him like they worship 'actual' God. And if anyone who doesn't believe in their ideologies and raises voice against the wrongdoings, he is termed as anti-national, Muslim and charged for sedition and blasphemy even if he belongs to the same religion they preach!
And in case, you think I am in favour of a particular party, you are wrong. I was once. Not anymore. I have realized all are same. I'm a NOTA guy.

आसान है

Here's my second poem in Hindi :D I'm finding it fun to write in Hindi though it's little difficult than writing in English. Btw, this post goes online on '16th December', the movie I love to watch again and again because of Milind Soman who is always a treat to watch <3 

रास्ता कितना भी कठिन हो,
समय कितना भी जटिल हो,
मेहनत और लगन सच्ची हो, सब
आसान है।

हिम्मत भले ही टूट जाये,
कदम भले ही रुक जाये,
ठान ली अगर एक बार जाने की, पहुचना
आसान है।

किस्मत बेशक रूठी हो,
मंज़िल बेशक झूटी हो,
दिल से मांगो अगर उसे, पाना
आसान है।

लड़क लड़क के चलना पड़े,
ऊंचा पहाड़ चढ़ना पड़े,
निष्चय अगर कर लिया एक बार, सफलता
आसान है।

पहुच गए एक बार ऊपर,
मंज़िल का एहसास किया छूकर,
हासिल भले ही ना वो हमे, संभलना
आसान है।

रास्ता सब सिखा देता है,
हिम्मत बड़ी दिला देता है,
आंसू भले गिर जाये रोकर, जीना
आसान है।

कोशिश हमारी सच्ची थी

So here's my first attempt at Hindi poetry. Not so good and meaningful but fine for a start. Somehow I liked the Urdu poetry in Ae Dil Hai Mushkil, so I wanted to write something in Hindi or Urdu. Next time I will try in Urdu (huh! that's going to be tough). This one is written as quatrain. 

गलती मैंने की नहीं,
पर सज़ा मैंने पा ली है।
चोट वहा लगी नहीं,
पर ज़ख्म अभी खाली है।

कदम बढ़ाया पहला था,
फिसल गए हम पानी में।
उठके होश संभाला तो,
पाया खुद को बेहाली में।

फिर चलने उठे ही थे,
आवाज़ लगा उसने रोक दिया।
इससे पहले हम कुछ पूछ सके,
मुह अपना उसने मोड़ दिया।

बिना बोले बिना सुने,
फैसला वो कर गए।
तोडा हमे ऐसा उसने,
मिटटी हमे वो कर गए।

पास तो हम कभी थे ही नहीं,
पर दूरी का अब एहसास हुआ।
मिले थे हम कभी नहीं,
पर बिछड़ने का ग़म इस बार हुआ।

हम भी किसी से कम नहीं,
हिम्मत हमारी पक्की थी।
वापस घर को निकल पड़े,
कोशिश हमारी सच्ची थी।

Rewind The Time

The balcony, the window, and the evenings, Get me back that time, Less of sad dawns, more of bright sunshine.
Cheerful sunsets, memorable books, On my building's terrace, Bring me back the memories to embrace.
When books were the best friends, And fear of future not in mind, Oh Lord! Send me back and rewind the time.
The greetings, the hellos, and the childish smile, When I was loved, and words not misunderstood, Take me to the era which had peace in the sky and worries under the hood.